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1984 सिख विरोधी दंगे में इन्साफ के लिए सिख संगतों ने की अरदास
January 11, 2019 • Delhi Search

नई दिल्ली, नवम्बर 1984 में सिख कौम के कत्लेआम दौरान निर्दोष एवं बेकसूर सिख मारे गये। इस संबंध में शिरोमणी गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी की ओर से विश्वभर में संगतों को इन्साफ के लिए आज अरदास करने का संदेश दिया। दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के महासचिव एंव दिल्ली के विधायक स. मनजिन्दर सिंह सिरसा ने गुरुद्वारा बंगला साहिब में अरदास में शामिल हुई संगतां के साथ विचार सांझे किये।

इस मौके पर सिरसा ने कहा कि सिख विरोधी दंगों में हजारों सिखों का कत्लेआम हुआ परन्तु 34 वर्ष बीत जाने के बाद भी सिखों ने लगातार इन्साफ के लिए संघर्ष जारी रखा। अफसोस तो इस बात का है कि जहां लोकतंत्र की सरकार हो वहां राज करने वाले ही कातिल बन जाये, ऐसा किसी भी लोकतंत्र देश में नहीं हुआ। इसके बाद सिरसा ने सिख विरोधी पर विस्तार से बताते हुए कहा कि इतिहास गवाह है कि विदेशी लूटरों से हिन्दुस्तान की बहु-बेटीयों को छुड़ाने वाले इन सिखों की इज्जत के साथ खिलवाड़ किया गया।

उन्होंने कहा कि जगदीश टाईटलर के कबूल किया कि राजीव गांधी ने कत्लेआम करने वाले नेताओं को मारे गये सिखों की संख्या का विवरण भी मांगा था। तब ही तो इनलोगों को संसद में सदस्यता, मंत्रीपद के उसी हिसाब से दिये गये थे। इन सभी में सबसे ज्यादा बढ़कर एच.के. एल.भगत, टाईटलर, सज्जन कुमार, ललित माकन और कमलनाथ जिसे अब मध्यप्रदेश की मुख्यमंत्री की कुर्सी दी गई है, का कत्लेआम में अह्म रोल रहा था। कमलनाथ ने तो नौवें गुरू के शहीदी स्थान गुरूद्वारा रकाबगंज साहिब में सिख कत्ल कर आग भी लगाई थी। सिरसा ने कहा कि इंदिरा गांधी के कत्ल के दोषीयों को तभी ही फांसी पर लटका दिया गया था पर हजारों सिखों के कत्लेआम के इन्साफ को 34 वर्ष बीत गये जो अभी भी अधूरा है।

सिरसा ने बीबी जगदीश कौर का जिक्र करते हुए कहा कि जिसने अपने परिवार के लोगां को आंखों के सामने शहीद होते देखा था पर किसी कोर्ट ने इन्साफ नहीं दिया क्योंकि उन सरकारां दौरान कोर्ट भी उनके दबाव में थे। परन्तु बीबी जी ने हिम्मत नहीं हारी। इसके साथ ही उन्होंने शिरोमणी अकाली दल के पूर्व अध्यक्ष स. प्रकाश सिंह बादल, अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल, विशेष कर बीबा हरसिमरत कौर बादल का धन्यवाद भी किया। जिन्होंने लगातार अपना संघर्ष जारी रखा और जो बंद पड़े 32 वर्ष पुराने केसों को दुबारा खोला। विशेष कर उन्होंने देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का धन्यवाद किया जिन्हांने एस.आई.टी. बनवा बंद किये गये केस दुबारा खुलवाये। इसके साथ ही उन्होंने उन सरकारी अफसर कुमार राजेश आई.पी.आफिसर का भी धन्यवाद किया। जिन्होंने सरकारी नौकरी की परवाह न करते हुए इन्साफ दिलाने में अह्म योगदान दिया।

सिरसा ने मीडिया का धन्यवाद करते हुए कुलदीप नैयर एवं ऐसे अन्य प्रसिद्ध पत्रकारों का भी धन्यवाद किया। हालांकि कुलदीव नैयर आज हमारे बीच नहीं हैं। पर उन्होंने अपने जीते जी सिखों के इस दर्द को महसूस किया। इस अवसर पर जत्थेदार कुलदीप सिंह भोगल सीनीयर अकाली नेता ने नवम्बर 1984 के सिख कत्लेआम की घटनाओं पर विस्थार से जिक्र करते हुए कहा कि कांग्रेसी नेताओं ने भयानक यातनाएं दे कर सिखों का मरवाया और कातिल आज भी सरेआम घूम रहे हैं। अब संगतों की अरदास है कि सज्जन कुमार जैसे जेल में हैं। टाईटलर एंव कमलनाथ की बारी कब आयेगी। उन्होंने प्रकाश सिंह बादल, सुखबीर सिंह बादल एवं बीबा हरसिमरत कौर बादल एवं मनजिन्दर सिंह सिरसा का तहें दिल धन्यवाद किया जिन्होंने नवम्बर 1984 के पीड़ित सिख परिवारां को इन्साफ दिलाने के लिए इनका लगातार संघर्ष जारी रखा एवं हार नहीं मानी। उन्होंने कहा कि बाकी बचे दोषी भी सजा के भागी बनें। इस दौरान कमेटी सदस्य कुलवंत सिंह बाठ, मनमोहन सिंह, परमजीत सिंह चंढोंक, दलजीत सिंह सरना एवं अन्य सदस्य गण मौजूद थे।