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हर देश की संस्कृति उस देश की धरोहर होती है: सोमनाथ भारती
January 18, 2019 • Delhi Search

नई दिल्ली,। संस्कृत साहित्य ज्ञान का सागर है। संस्कृत भाषा एंव सहित्य में भारतीय संस्कृति का को स्रोत है। भाषा कोई भी हो वह व्यक्ति के विचारों की अभिब्यक्ति का आधार है। भाषा की समृद्धि भाषा के संबाद से होती है। आज संस्कृत भाषा आम बोल चाल में बहुत कम है पर इसको जानने वाले बहुत लोग है। संस्कृत भाषा के विकास एवं प्रचार प्रसार में अनेक संस्थायें विद्वान आदि निरन्तर कार्य कर रहे हैं। संस्कृत श्लोकों की संगीतमय प्रस्तुति, भाषण, बाद विवाद आदि अपने आप में एक नई अनुभूति देती है। दिल्ली संस्कृत अकादमी को भी निरन्तर अपने प्रयासों से संस्कृत से जुड रही इस युवा पीढी को संस्कृत बोलने का प्रयास करवाना चाहिये। संस्कृत भाषा प्रतियोगिताओं एवं सम्मानों तक ही सीमित न हो इस का व्यापक स्तर विस्तार करने पर जोर देना होगा।



ये विचार दिल्ली संस्कृत अकादमी दिल्ली सरकार द्वारा गार्गी सर्वोदय कन्या विद्यालय, ग्रीन पार्क नई दिल्ली में आयोजित दिल्ली शिक्षा निदशालय के दक्षिण मण्डल की संस्कृत प्रतियोंगिताओं के पुरस्कार वितरण समसरोह के अवसर पर मुख्य अतिथि दिल्ली विधान सभा के सदस्य सोमनाथ भारती ने व्यक्ज किये। भारती ने आगे कहा कि कोई भी देश बिना अपनी संस्कृति के अन्य देशों से अलग नहीं हो सकता। हर देश की अपनी पहचान उसकी संस्कृति ही है। विश्व के सभी देश चाहे रूस हो, फ्रान्स हो, जर्मनी हो जापान हो सभी देश विकास के साथ साथ अपनी संस्कृति को भी साथ लेकर चलते हैं। आज जब हम जीवन के अहम निर्णय लेते हैं तो हमें अपने छात्र जीवन में ग्रहण की गई संस्कृत शिक्षा से जो ज्ञान अर्जित किया उस के माध्यम से हर कायम को सफलता से पूरा कर लेते हैं। आप लोगों को भी संसकृत में लियो ज्ञान को सीखने का प्रयास करना चाहिये।

इस अवसर पर दिल्ली संस्कृत आकदमी के सचिव डॉ. जीतराम भट्ट ने संस्कृत के महत्व पर बल देते हुए कहा कि छा़त्र/छात्राओं एवं देश के सर्वागीण विकास करने वाले लोगों को समय का सदुपयोग करना चाहिये। दिल्ली संस्कृत अकादमी द्वारा दिल्ली के शिक्षा निदेशालय के 13 मण्डलों में आयोजित प्रतियोगिता में भाग लेने वाले छात्र-छात्राओं को आज पुरस्कार राशि से सम्मानित किया जा रहा है। इस वर्ष इन प्रतियोगिताओं में दस हजार से अधिक छात्र-छात्राओं ने भाग लियेा। अकादमी इस वर्ष सभी प्रतिभागियों को नकद राशि से सम्मानित कर रही है। दिल्ली के संस्कृत के छात्रों को इतनी संख्याा में सम्मानित करना अपने आप में बहुत बढी उपलब्धि है। देश के विकास हर विषय का अपना अपना महत्व है केवल विज्ञान या अंग्रेजी भाषा से ही देश का विकास सम्भव नहीं है। संस्कृत भाषा का देश के विकास में महत्त्वपूर्ण योगदान है जितना अन्य भाषाओं का। युवा वर्ग का जिस प्रकार से संस्कृत के प्रति उत्साह है इस उत्साह में दिल्ली संस्कृत अकादमी का सबसे बड़ा योगदान है।

इस अवसर पर कार्यक्रम के बारे मे बताते हुऐ विद्यालय की उपप्रधानाचार्य एवं मण्डल की संयोजिका मनीषा मल्होत्रा ने कहा कि आज से इस मण्डल की संस्कृत प्रतियोगिताओं में श्लोक संगीत, श्लोकोच्चारण, संस्कृत काव्यालि, संस्कृत वाद विवाद, संस्कृत भाषाण एवं एकल श्लोक संगीत प्रतियोगितायें आयोजित की गई थी। आज इन सभी प्रतिभागियों को पुरस्कृत कर संस्कृत के विकास के लिये नया मार्ग प्रसस्त किया जा रहा है। देश में प्रतिभा को तैयार करने में संस्कृत भाषा एवं युवा वर्ग का महत्वपूर्ण योगदान रहा है। संस्कृत विश्व की प्राचीन भाषा के साथ शुद्ध रूप से वैज्ञानिक भाषा है। इस भाषा में विश्व का उच्च को टिका साहित्य एवं ज्ञान विज्ञान निहित है साथ ही संस्कृत सभी भाषाओं की जननी है।