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सिरवों के संविधानिक अधिकारों को लेकर दिल्ली हाईकोर्ट सरत
December 22, 2018 • Delhi Search

।। दिल्ली सर्च संवाददाता।।। नई दिल्ली सिखों के द्वारा संविधान के अनुच्छेद 25 के तहत मिले बुनियादी व धार्मिक अधिकारों के सुरक्षा ऐजेंसियों द्वारा उल्लंघन करने के लगाये जाते आरोपों पर आज दिल्ली हाईकोर्ट ने भारत सरकार को नोटिस जारी किया है। क्योंकि सिखां के द्वारा सुरक्षा अधिकारियों के प्रशिक्षण कोर्स में सिखों को संविधान द्वारा प्रदत अधिकारों की जानकारी जरूरी तौर पर देने की मांग उठाई गई थी। दरअसल 15 अगस्त 2018 को लालकिला पर रहे स्वतंत्रता दिवस समागम में भाग लेने के लिए जयपुर से दिल्ली आये सिख नवयुवक जसप्रीत सिंह के कृपाण धारण करने के कारण सुरक्षा एजेंसियों ने उसे लालकिला मैदान पर दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी को इस संबंधी शिकायत दी थी। मसले की गंभीरता का दखत हुए कमा अध्यक्ष मनजीत सिंह .के. द्वारा दिल्ली हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर की गई थी। आज हुई सुनवाई के दौरान । मुख्य न्यायाधीश की खंडपीठ ने मामले को गंभीरता को समझते हुए भारत सरकार को जवाब देने के लिए कहा है। जी.के. ने अकाली दल कायालय में पत्रकारों से बातचीत करते हुए सिखों के ककारी को लेकर दिल्ली हाइकाट म अब कुल ३ मामल चलन का जानकारी दी। .के. ने कहा कि संविधान सिखों को कृपाण धारण करने की आजादी देता है। परन्तु सुरक्षा अधिकारी कभी अमृतधारी सिख विद्यार्थीयों परीक्षा केन्द्र में दाखिल होने से रोकते हैं कभी प्रधानमंत्री के संबोधन को सुनने से रोका जाता है। जी.के. ने कहा कि कृपाण व देना कडे को लेकर दिल्ली कमेटी की तरफसे दायर गई पहली 2 याचिकाओं के साथ आज के मामले सिख को भी कोर्ट ने जोड़ दिया है। जबकि एक दोबारा याचिका की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट की एसतरफ से मैडिकल प्रवेश परीक्षा नीट के परीक्षा का केन्द्र में सिख परिक्षार्थियों के कपाण व कडे की सहित परीक्षा केन्द्र जाने की अनुमति देने वाला अच्छा अंतरिम आदेश भी दिया गया था।

जी.के. ने 2002 बताया कि कमेटी की तरफ से इस मामले में संज्ञान गाईडलाईन बनाने की मांग की गई है। ताकि दी सविंधान के अनुच्छेद 25 के तहत नागरिकों आखिरकार को मिले संविधानिक अधिकारों के साथ देश वर्ष की सुरक्षा के बीच तालमेल बैठाया जा सके। बनाने साथ ही परे भारत में कपाण तथा कडा धारण कार्य करके बिना रोक टोक से सिख घूम सके। सहित जी.के. ने बताया कि याचिका में भारत सरकार जों तथा दिल्ली पलिस कमिश्नर को सिखों के बनाई धार्मिक अधिकारों की रक्षा के लिए आदेश जस्टिस देने की भी मांग की गई है। साथ ही सुरक्षा बताते अधिकारियों के प्रशिक्षण कोर्स में सिखों को बंद संविधान द्वारा प्रदत अधिकारों की जानकारी कहींकोर्ट ने यह देना सुनिश्चित किया जाये, यह मांग भी रखी गई है। जी.के. ने सुप्रीम कोर्ट द्वारा 1984 सिख कत्लेआम के बंद 186 मामलों को दोबारा से खोलने के लिए 2 सदस्यीय एस.आई.टी. बनाने के आज सुनाये गये फैसले का भी स्वागत किया। जी.के. ने 186 मामलों की जांच दोबारा खोलने की देरी से लिया गया अच्छा फैसला करार दिया। जी.के. ने कहा कि 2002 के गुजरात दंगों पर सुप्रीम कोर्ट ने स्वयं संज्ञान लेकर अपने स्तर पर एस.आई.टी बना दी थी। पर सिखां द्वारा पैरवी करने के बाद आखिरकार देश की सबसे बड़ी अदालत 34 वर्ष बाद अपनी निगरानी में एस.आई.टी. बनाने को राजी हुई है। यदि सुप्रीम कोर्ट ने यह कार्य 1984 में कर लिया होता तो शायद 2002 सहित कई प्रकार के अल्पसंख्यकों के खिलाफ जों दंगे हुए वो ना होते। सुप्रीम कोर्ट द्वारा बनाई गई एस.आई.टी. के प्रमख सेवामुक्त जस्टिस एस.एन, ढींगरा को काबिल इन्सान बताते हुए जी.के. ने दिल्ली कमेटी द्वारा 186 बंद मामलों में पूरा सहयोग देने की भी बात कहीं।