ALL delhi Business Ghaziabad Faridabad Noida STATE vichar
वास्तु शास्त्र संस्कृत साहित्य में निहित पूर्णरूप से निहित भारतीय विज्ञान: डॉ. जीतराम भट्ट
December 26, 2018 • Delhi Search

दिल्ली संस्कृत अकादमी द्वारा अकादमी के सभागार में आयोजित वस्तु शास्त्र संस्कृत अध्ययन केन्द्र का शुभारम्भ करते हुए अकादमी के सचिव डॉ. जीतराम भट्ट ने कहा कि वास्तु शास्त्र संस्कृत साहित्य में निहित पूर्णरूप से निहित भारतीय विज्ञान है। वास्तु शास्त्र की उत्पत्ति भारत में हुई है। भारतीय ज्ञान विज्ञान भारतीय शिक्षा केन्द्रों के माध्यम से चीन, जापान, तिब्बत, दक्षिण पूर्व ऐशिया और श्रीलंका में फैला और वर्तमान में सारे विश्व में प्रचलित होने लगा है।

डॉ. भट्ट ने आगे कहा कि वास्तु पर विश्व में अनेक प्रकार का शोध कार्य हो रहा है। आधुनिक तकनीकि शिक्षा में वास्तु का महत्वपूर्ण योगदान है। किसी भी स्थान पर कोई निर्माण कार्य करने से पहले उस स्थान के गुण दोषो को वास्तु के माध्यम से दूर किया जा सकता है। ये कक्षायें अकादमी परिसर में सोमवार से शुक्रवार को चलायी जायेगी। इन कक्षाओं में उच्च कोटि के शिक्षकों के द्वारा प्रतिभागियों को शिक्षण दिया जाता है। इस वर्ष के इन शिक्षार्थियों की संख्या से यह लगता है कि इस अध्ययन केन्द्र के माध्यम से उपस्थित प्रेमियों ने वास्तु शास्त्र के सिद्धान्त को सीखने में जन सामान्य की बहुत रूचि है।

इस अवसर पर कनाडा देश की निवासी उवं वर्तमान में संस्कृत संवादशाला मंडोली में रहने वाली वनीषा (वाणी) ने कहा कि संस्कृत साहित्यों में निहित अनेक विषय विश्व को नये विज्ञान का ज्ञान देता है। इस में वास्तु शास्त्र भी एक ऐसा ही विषय है कि इस में विज्ञान के सभी तत्व निहित हैं जो किसी भी स्थान के विषय में सम्पूर्ण जानकारी देता है। इसी के अनुसार उस स्थान को उपयोंग किया जाना चाहिये। मैं एक आर्कियोटैक्ट हूं भारतीय वास्तुशास्त्र को जानने के लिये भारत आया हूं। संस्कृत साहित्य में निहित ज्ञान विज्ञान एक दूसरे के पूरक होते हैं। ज्योतिष, आयुर्वेद, योग, वास्तुशास्त्र आदि विषयों का ज्ञान एक दूसरे में समाहित है। एक विषय का दूसरे विषय से पूर्ण रूप से सम्बन्ध है।

इस अवसर पर रूस देश से आये जेहरलको आन्द्रे ने कहा कि मैं विगत 10 वर्षो से संस्कृत अध्ययन कर रहा हूं राष्ट्रीय संस्कृत संस्थान से नव्यव्याकरण में शोध कर रहा हूं। मेरे पिता ने अनेक संस्कृत भाषा के ग्रन्थों को रूसी भाषा में अनुबाद किया है। संस्कृत विश्व की सबसे समृद्ध संस्कृति की पोषक होने के कारण में इस भाषा को सीखना चहता हूं। संस्कृत भाषा पढने के अन्य अनेक कारण भी हैं जिससे के कारण में संस्कृत का अध्ययन कर रहा हूं।

इस अवसर पर आचार्य राज कुमार द्विवेदी ने कहा कि शिक्षा के सभी विकल्पों में वास्तु शास्त्र सवसे वैज्ञानिक परक विषय है। वास्तु भारतीय प्राचीन विज्ञान है। इसकी गणना आज भी वैज्ञानिको के लिये आश्चर्य का विषय है। परन्तु यह आश्चर्य नहीं विज्ञान है। ये हमारे ऋषियों द्वारा गहन अध्ययन के बाद इसे इस रूप में विकसित किया है। वास्तु में कई क्षेत्र हैं भवन निभर्ण, दुकान का स्वरूप, फैक्ट्री निमार्ण एवं स्थान का चयन आदि। इसके अलावा भी कई विषयों की वैज्ञानिकता को लिये हुये है जिसमें से कई विषय ऐसे है कि जो अब उपलब्ध ही नहीं है परन्तु यदि शोध किया जाय व पुरातत्व आदि अन्य क्षेत्रों से सहयोग ले कर कार्य किया जाय तो संस्कृत में अनेक विषय मिल जायेगे। इस अवसर पर सुनील जोशी, हिमाषु रतूडी सहित अनेक गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।