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भारतीय कंपनियों ने 2018 में शेयर-ऋण बाजार से जुटाये 6 लाख करोड़ रुपये
December 23, 2018 • Delhi Search

भारतीय कंपनियों ने शेयर और ऋण बाजार से 2018 में 6 लाख करोड़ रुपये के करीब जुटाये हैं लेकिन बाजार में उतार-चढ़ाव की वजह से इसमें करीब 30 प्रतिशत की कमी हुई है। साथ ही 2019 से आम चुनावों से पहले राजनीतिक अनिश्चिचतता के चलते नये साल की पहली छमाही में भी पूंजी जुटाने की गतिविधियों में सुस्ती की आशंका है। हालांकि, विशेषज्ञों ने उम्मीद जताई है कि 2019 की दूसरी छमाही में निवेश माहौल सुधरने के साथ ही पूंजी जुटाने की गतिविधियों में तेजी आयेगी। आंकड़ों से पता चला है कि उद्योग जगत के लिये बॉन्ड बाजार अभी भी पूंजी जुटाने के लिये सबसे पसंदीदा विकल्प बना हुआ है।

प्राइम डाटाबेस द्वारा संकलित आंकड़ों के मुताबिक, पूंजी बाजार से इस साल अब तक कुल 5.9 लाख करोड़ रुपये जुटाये गये हैं। जिसमें बड़ा हिस्सा ऋण बाजार (5.1 लाख करोड़ रुपये) का है। शेष बचे 78,500 करोड़ रुपये शेयर बाजार से जुटाये गये हैं। साल 2017 में कंपनियों ने कुल 8.6 लाख करोड़ रुपये जुटाये थे। जिसमें ऋण बाजार की हिस्सेदारी करीब 7 लाख करोड़ और शेयर बाजार की हिस्सेदारी 1.6 लाख करोड़ रुपये थी। शेयर बाजार में, ज्यादातर पूंजी आरंभिक सार्वजनिक निर्गम (आईपीओ) और संस्थागत निवेशकों को शेयर जारी करके जुटाये गई हैं।

विशेषज्ञों ने कहा कि इस साल के अंत तक पूंजी और ऋण बाजार से जुटाये गयी राशि 6 लाख करोड़ रुपये के करीब रहने की उम्मीद है। मुख्य रूप से व्यापार विस्तार की योजनाओं, ऋण चुकाने और कार्यशील पूंजी की जरूरतों को पूरा करने के लिये धन जुटाया गया है, जबकि आईपीओ से जुटाई गई बड़ी राशि प्रर्वतकों, निजी इक्विटी फर्मों और अन्य मौजूदा शेयरधारकों के हिस्से में गयी।

सेंट्रम कैपिटल के प्रबंध निदेशक (निवेश बैंकिंग) राजेंद्र नाइक ने कहा, वैश्विक एवं घरेलू कारकों के चलते 2018 का आखिरी महीने शेयर बाजारों के लिये चुनौतीपूर्ण रहे। वैश्विक स्तर पर, इस साल अगस्त-अक्टूबर के दौरान कच्चे तेल की कीमतों में करीब 20 प्रतिशत की तेजी देखी गयी। इस दौरान बॉन्ड प्रतिफल में वृद्धि हुयी। नाइक ने कहा, घरेलू मोर्च पर पेट्रोल और डीजल के दाम सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गये और ब्याज दर भी बढ़ी। इसके अलावा आईएलएंडएफएस द्वारा चूक और एनबीएफसी के सामने नकदी की समस्या का भी शेयर बाजार पर नकारात्मक प्रभाव पड़ा। उन्होंने कहा कि दिसंबर में हुये पांच राज्यों के विधानसभा चुनावों के चलते भी निवेशकों ने बाजार से दूरी बनाई।