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कौन जोइता है भगवान से नाता
January 27, 2019 • Delhi Search

की फितरत ऐसी बन इंसान गई है कि वह आसानी से इस तरफ ध्यान नहीं देता, इसीलिए युगों-युगों से पीर-पैगम्बर दोहरा रहे हैं कि परमात्मा से नाता जोड़कर ही जीवन का सफर सफल हो सकता है। वे इंसान का ध्यान इस ओर दिला रहे हैं कि अमूल्य जन्म पाकर तुझे अपना लक्ष्य प्राप्त करना है और यह लक्ष्य है, आत्मा का परमात्मा से नाता जोड़कर इसे मोक्ष की भागीदार बनाना। जो ब्रह्मज्ञानियों से नाता जोड़कर इस लक्ष्य को प्राप्त कर लेता है, उसका जीवन सार्थक हो जाता है। फिर वह सभी भ्रम और भ्रांतियों से निजात पा लेता है। आत् मन दोनों रोशन हो जाते हैं, फिर वह अपनी । जीवन यात्रा ज्ञान के उजाले में तय करता है।फिर वह औरों के लिए भी भार्ग प्रदर्शक बन जाता है, प्रेरणा का स्रोत बन जाता है। जब कुरुक्षेत्र के मैदान में अर्जुन को ज्ञान की दृष्टि प्राप्त हुई, तब वह भगवान श्रीकृष्ण को दसों दिशाओं में नतमस्तक हुआ था। इसी प्रकार, जिसे भी यह प्राप्त हो जाताहै, वह फिर औरों को संदेश देता है कि उसने पारब्रह्म परमात्मा को अंग-संग जान की आत्मा परमात्मा का दर्शन कर रही है। । किसी बात की केवल जानकारी हो जाना ही पूर्णता की निशानी नहीं है। जानकारी के साथ कर्म का आचरण का । होना बहुत जरूरी है। आज संसार में ज्ञान की कोई कमी नहीं लेकिन ज्ञान के साथ। कर्म नहीं जुड़ा है, इसीलिए इंसान दुखी । है। एक सुनना होता है और एक सुनाना। होता है। हम सुनते कानों से हैं और सुनाते । रसना से हैं लेकिन संतजन केवल इन। । इंद्रियों तक सीमित न रहकर इनसे ऊपर सोचते हैं कि मन ने सुनना है और फिर कर्म ने सुनाना है। प्रभु की पहचान किए बिना सभी कर्म व्यर्थ हो जाते हैं। जैसे कोई रेलगाड़ी में सफर करने वाला यात्री कहे कि वह विनम्र है, सज्जनता से रहता है, सबसे अच्छा बोलता है, सबकी सहायता करता है, सबका सत्कार करता है लेकिन अगर उसने टिकट नहीं लिया तो वह बख्शा नहीं जायेगा, उसके सभी अच्छे कर्म भी बेकार हो जायेंगे। इसी प्रकार अगर इंसान प्रभु को जानकर इसकी भक्ति नहीं करता तो उसके सभी अच्छे कर्म महत्वहीन हो जाते हैं, वह उसे मुक्ति नहीं दिला सकते। ज्ञान और कर्म दोनों ही जीवन के महत्वपूर्ण अंग हैं जिन्हें एक-दूसरे से अलग नहीं किया जा सकता। पक्षी के दो पंख होते हैं, वह उन पंखों के बल पर आकाश की ऊचाईयां छू लेता है। यदि उसका एक पंख काट दिया जाए तो वह कहीं का भी नहीं रहता। इसी प्रकार ज्ञान और कर्म का समन्वय ही इंसान को जीवन में ऊंचाईयों पर ले जाता है। ज्ञान और कर्म के संयोग से ही निष्काम भक्ति का फल प्राप्त होता हैऔर इंसान मोक्ष प्राप्त करने में सफल होता है।