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कंक्रीट के जंगल में मानव जीवन का सर्वनाश
July 8, 2019 • Delhi Search

मनुष्य ने अपने आप को हर क्षेत्र में इतना हाइटैक कर लिया कि अब वो प्राकृतिक को छोड़कर
अप्राकृतिक चीजों को अपनाने लगा। इसके सबसे ज्यादा प्रभाव महानगरों में देखने को मिल रहा है। पेड़-
पौधों को काटकर हर जहग कंक्रीट का जंगल बना दिया मतबल हरियाली को खत्म कर हर तरफ बड़ी
बड़ी इमारतें बनती जा रही हैं। जंगल या हरियाली खत्म होने का प्रभाव महानगरों में तो स्पष्ट दिखाई
देने लगा। यहां पर आज मनुष्य की उम्र मात्र 55-60 वर्ष रह गई। यह जहर हम कब पी गए हमें पता
ही नही चला लेकिन धीरे से यह तो समझ आ गया कि अब इंसान ने अपना सर्वनाथ खुद करना प्रारंभ
कर दिया।
सरकार व संबंधित अथॉरिटी तो किसी भी एरिये को डेवलेपमेंट तरीके से करती है लेकिन बिल्डरों के साथ
मिलकर कुछ अधिकारी लालच के चक्कर में लोगों के भविष्य के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं। दरअसल
मामला यह है कि कोई भी बिल्डर जब किसी जहग पर बिल्डिगं बनाता है तो वहां से वो जो पेड़ काटता
है, इस पर कानून यह है कि बिल्डर जितने पेड हटाएगा उतने ही कहीं आसपास लगाएगा। लेकिन ऐसा
करने की जहमत कोई भी नही उठाता क्योंकि यह काम बिल्ड़र को व्यर्थ लगता है। चूंकि यह एक नाम
मात्र प्रक्रिया है तो इसलिए संबंधित अधिकारियों को कुछ पैसा देकर मामला निपट जाता है। लेकिन यह
लोग इतनी बड़ी बात से अंजान है कि इससे होने वाली समस्या से वह खुद भी नही बच सकते। यह
हमारे देश का सबसे बड़ा दुर्भाग्य है कि हर कोई जल्दी अमीर बनने के लिए दिशाहिन रास्तों पर भाग
रहा है। जिस ओर ध्यान देना चाहिए वहां कोई अपनी उपस्थिति दर्ज ही नही कराना चाहता।
हम इस घटना को लेकर उदाहरण के तौर पर देश की राजधानी दिल्ली की बात करें तो यहां चारों ओऱ
हरियाली बिल्कुल खत्म हो गई। एक तरफ नोएडा, दूसरी ओर गाजियाबाद (राजनगर), तीसरी ओर

गुरुग्राम तो चौथी तरफ द्वारका में बनी बड़ी बड़ी इमारतों से घिर चुकी है। आज हरेक को हाईटैक सिटी
में रहना पसंद है जिसके चलते यहां लोग फ्लैटों में शिफ्ट हो रहे हैं।जैसा कि राजधानी होने के कारण हर
राज्य के लोग यहां शौक व मजबूरी दोनों ही स्थिति में रहते हैं तो दिल्ली के साथ आस-पास के इलाके
भी भरने लगे। क्योंकि बात स्पष्ट है कि जहां पेड़-पौधे कम होंगे तो वहां प्रदूषण भी ज्यादा होगा, जिससे
बीमारियों का उत्पन्न होना तय है। औऱ आज वो उस तरह की बीमारियां होने लगी जिसकी मनुष्य ने
कभी कल्पना भी नही की थी। शुगर, बीपी के थाइराइड जैसी बीमारी हर घर में आपको मिलेगी। कम
आयु में अटैक पडना या शुगर होना तो अब छोटी घटनाओं में देखा जाने लगा क्योंकि इसके अलावा
विचित्र तरह के रोग से यहां के लोग ग्रस्त होने लगे।
अब सवाल यह है कि हम अपने आने वाली पीढ़ी को क्या देकर जाएगें। पैसा से नही निरोगी काया से
जिंदगी कटेगी। इसलिए सबको जरुरत है एक साथ इस क्षेत्र में कदम रखने की जिससे बिगडती दुनिया
को संभाला जाए। बिल्डरों व भ्रष्ट अधिकारियों पर निगाह बनाए रखते हुए यदि वो गलत कर रहे हैं तो
उनकी शिकायत की जाए। हाल ही में नोएडा में एक बिल्डर बेहद गलत तरीके से बिल्डिगं बना रहा था।
उसने अपने एरिया के अलावा भी कई पेड़ काट दिए जिसकी उसके पास अनुमति नही थी। जिस पर
आस पास के लोगों ने शिकायत करते हुए उस पर कार्यवाही करवाई। यह एक प्रेरणादायक मिसाल बन
गई। इसके अलावा हमें अपनी ओर से भी हरियाली की ओर ध्यान देने की जरुरत हैं। हाल ही में
छत्तीसगढ़ में स्थित अंडी गांव के हायर सेकंडरी स्कूल में एडमिशन देने के लिए स्कूल के प्रशासन ने एक
अलग और अनोखी पहल की है।
इस स्कूल में एडमिशन लेने के लिए एक शर्त यह है की विधार्थियों को एक पौधा लगाकर उसे चार साल
तक पालकर बड़ा करना होगा। इसके लिए छात्रों को दस बोनस अंक भी दिए जाते है। छत्तीसगढ़ की
राजधानी रायपुर से 130 किलोमीटर दूर वनांचल में स्थित यह स्कूल पर्यावरण संरक्षण का जमीनी पाठ
पढ़ा रहा है। स्टूडेंट्स ने यह पौधा कहाँ लगाया है स्कूल में दाखिले के वक़्त यह चीज़े लिखित में देनी
पड़ती है। स्कूल की इस अनोखी पहल के कारण स्कूल परिसर और गांव के दूसरे सार्वजनिक स्थल भी
बीते तीन साल के अंदर ही सैकड़ों हज़ारों छोटे-छोटे वृक्षों से हरे-भरे लगने लगे हैं। एक ओर हम बच्चों
को इस तरह की शिक्षा दे रहे हैं वहीं दूसरी ओर कुछ लोग उनको अपने लालच के चलते इस तरह की
हरकत कर देश को खतरे में ड़ाल रहे हैं।
जरुरी नही होता कि है कि हम सभी काम सरकारों और विभागों पर छोड़ दें, अपने जिंदगी के लिए कुछ
काम स्वयं भी करने चाहिए। यदि हम यह सोच लें कि हमें क्या लेना तो, यह समझना जरुरी है कि आप
अपने को मौत की सजा खुद दे रहे हैं। इसलिए प्रकृति को नष्ट करने की बजाए उसे बढ़ावा दें जिससे
मानव जीवन लुप्त होने की बजाए खुशहाल रहे।
-योगेश कुमार सोनी-
(लेखक वरिष्ठ पत्रकार है)